पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) भारत सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के उत्थान के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई यह योजना वित्तीय वर्ष 2027-28 तक चलेगी और इसका उद्देश्य विश्वकर्मा समुदाय से आने वाले लोगों को व्यापक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत न केवल ₹15,000 का मुफ्त टूलकिट मिलता है, बल्कि 5% की रियायती ब्याज दर पर ₹3 लाख तक का ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है।
अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां आपको पात्रता मानदंड, लाभ, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी।
पीएम विश्वकर्मा योजना के प्रमुख लाभ
इस योजना के तहत लाभार्थियों को कई तरह के फायदे मिलते हैं, जो उन्हें अपने काम को बेहतर बनाने और आर्थिक रूप से सशक्त होने में मदद करते हैं:
- ₹15,000 का मुफ्त टूलकिट: सफल पंजीकरण और प्रशिक्षण के बाद, कारीगरों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 का ई-वाउचर/अनुदान प्रदान किया जाता है।
- सस्ता ऋण: लाभार्थियों को दो किस्तों में कुल ₹3 लाख तक का गारंटी-मुक्त ऋण (Collateral-free loan) मिलता है। पहली किस्त में ₹1 लाख और दूसरी किस्त में ₹2 लाख का ऋण 5% की बेहद कम ब्याज दर पर उपलब्ध होता है।
- कौशल प्रशिक्षण: कारीगरों के कौशल को निखारने के लिए 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण (Basic Training) और 15 दिनों या उससे अधिक का उन्नत प्रशिक्षण (Advanced Training) दिया जाता है।
- प्रशिक्षण के दौरान वजीफा: ट्रेनिंग अवधि के दौरान प्रतिदिन ₹500 का वजीफा (Stipend) भी दिया जाता है।
- डिजिटल प्रोत्साहन: डिजिटल लेनदेन (Digital transactions) के लिए प्रोत्साहन राशि और मार्केटिंग में सहायता भी मिलती है।
- Udyam Assist Certificate: योजना के तहत पंजीकरण के बाद ‘उद्यम असिस्ट सर्टिफिकेट’ (Udyam Assist Certificate) भी जनरेट होता है, जो MSME रजिस्ट्रेशन के बराबर होता है।
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ लेने के लिए कुछ विशिष्ट शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 50 वर्ष (कुछ स्रोतों के अनुसार 60 वर्ष) के बीच होनी चाहिए।
- पारंपरिक व्यवसाय: आवेदक को 18 निर्धारित पारंपरिक trades (व्यवसायों) में से किसी एक में संलग्न होना चाहिए (सूची नीचे दी गई है)।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: आवेदक ने केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान ऋण-आधारित योजना (जैसे PMEG, Mudra Yojana) का लाभ पिछले 5 वर्षों में न लिया हो।
- परिवार की सीमा: एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकता है।
- सरकारी कर्मचारी: आवेदक सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
18 पारंपरिक व्यवसायों की सूची (18 Trades List)
यह योजना मुख्य रूप से हाथ से काम करने वाले और पारंपरिक कौशल वाले लोगों के लिए है। 18 योग्य व्यवसायों की सूची में शामिल हैं:
- बढ़ई (Carpenter)
- नाव बनाने वाला (Boat Maker)
- अस्त्र बनाने वाला (Armourer)
- लोहार (Blacksmith)
- हथौड़ा और टूलकिट निर्माता (Hammer and Toolkit Maker)
- ताला बनाने वाला (Locksmith)
- सुनार (Goldsmith)
- कुम्हार (Potter)
- मूर्तिकार (Sculptor), पत्थर तराशने वाला (Stone carver)
- मोची (Cobbler/Shoecraft worker)
- राजमिस्त्री (Mason/Construction worker)
- टोकरी/चटाई/झाड़ू बनाने वाला (Basket/Mat/Broom Maker)
- गुड़िया और खिलौना निर्माता (Doll and Toy Maker)
- नाई (Barber)
- माला बनाने वाला (Garland Maker)
- धोबी (Washerman)
- दर्जी (Tailor/Stitcher)
- मछली का जाल बनाने वाला (Fishing Net Maker)
पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल है। इच्छुक और पात्र व्यक्ति ऑनलाइन या जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:
- आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: योजना के लिए पंजीकरण PM Vishwakarma Portal पर जाकर किया जा सकता है।
- CSC पर पंजीकरण: आवेदन के लिए आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जा सकते हैं, जहां CSC अधिकारी आपकी तरफ से पोर्टल पर लॉग इन करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करेंगे।
- आवश्यक दस्तावेज़: पंजीकरण के लिए आपके पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण (पासबुक), और राशन कार्ड होना अनिवार्य है।
- दस्तावेज अपलोड और सत्यापन: आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। ग्राम पंचायत या यूएलबी/जोन स्तर पर सत्यापन (Verification) किया जाएगा।
- प्रशिक्षण: सत्यापन के बाद, आपको कौशल प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
- लाभ प्राप्त करें: प्रशिक्षण पूरा होने पर, आपको ₹15,000 का टूलकिट ई-वाउचर और ऋण के लिए बैंक से संपर्क करने का विकल्प मिलेगा।
पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का एक प्रयास है, जिससे उन्हें अपने कौशल को आधुनिक बनाने, बेहतर उपकरण खरीदने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद मिल रही है। 30 लाख से अधिक कारीगर पहले ही इस योजना से जुड़ चुके हैं।







